वैयक्तिक ईश्वर ( प्रकृति ) सत् और
असत् दोनो का धारक है । अपरिवर्तनीय ब्रम्ह का रूप सत् तथा संसार के रूपों के सृजन
की क्षमता द्वारा सृजित रूप असत् । माया ही वह शक्ति है जो ब्रम्ह को रूप सृजित
करने में समर्थ बनाती है । माया ईश्वर की रूप प्रगट करने की शक्ति है । माया और
ईश्वर इस रूप में एक दूसरे के आश्रित हैं और अनादि काल से विद्यमान हैं ।
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