उत्तरोत्तर विचारों में निम्न
प्रकृति को ही माया कहा जाता है क्योंकि पुरुष के विषय में बताया जाता है कि इस
संसार की रचना को सम्भव बनाने के उद्देष्य से ब्रम्ह पुरुष को प्रकृति के गर्भ में
स्थापित करते हैं । समस्त प्रगट रूप प्रकृति निर्मित ही होते हैं ।
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