माया कंचिद संसार को भ्रम नहीं
बताती । परम् सत्य ब्रम्ह का ज्ञान होने पर विनाशशील संसार भ्रम समान प्रतीत होने
लगता है । ब्रम्ह की उपस्थिति होने पर ही संसार का स्वरूप सम्भव होता है । यह
समस्त अनुभूतियाँ ब्रम्ह की महिमा का प्रमाण है । ब्रम्ह की अनूठी महिमा जिसको कि
इस संसार को उपलब्ध ज्ञान द्वारा जाना नहीं जा सकता है उसे माया शब्द द्वारा
व्यक्त किया जाता है । ब्रम्ह ने इस संसार को बना कर अपने इसके कण कण में उपस्थित
होते हुये भी अपने को इस संसार की दृष्टि से छिपा लिया है । यह माया के प्रभाव से
सम्भव हुआ है ।
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