गुरुवार, 21 अगस्त 2014

योगमाया

रूप सृजित करने की क्षमता परम् सत्य ब्रम्ह में निहित है । माँ शब्द का अर्थ बताया जाता है सृजित करना, बनाना । अनादि काल से इस शब्द का प्रयोग रूप सृजित करने की क्षमता को व्यक्त करने के लिये किया जाता रहा है । हम प्रत्येक का अस्तित्व कहाँ से मिला माँ से । ब्रम्ह जिस निर्माण शक्ति से इस समूचे ब्रम्हाण्ड को रूप प्रदान करता है उसे योगमाया कहा जाता है । ब्रम्ह की रूप सृजित करने की क्षमता को मायिन कहा जाता है । यह संसार का स्वरूप जो सम्मुख है सब ब्रम्ह की माया है । 

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