रूप सृजित करने की क्षमता परम्
सत्य ब्रम्ह में निहित है । ‘ माँ ‘ शब्द का अर्थ बताया जाता है – सृजित करना, बनाना । अनादि काल से इस शब्द का प्रयोग रूप सृजित
करने की क्षमता को व्यक्त करने के लिये किया जाता रहा है । हम प्रत्येक का
अस्तित्व कहाँ से मिला – माँ से । ब्रम्ह जिस निर्माण शक्ति से इस समूचे
ब्रम्हाण्ड को रूप प्रदान करता है उसे योगमाया कहा जाता है । ब्रम्ह की रूप सृजित
करने की क्षमता को मायिन कहा जाता है । यह संसार का स्वरूप जो सम्मुख है – सब ब्रम्ह की माया है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें