माया के रूप 5 में अंकित अविद्या माया मात्र हम मनुष्यों के लिये सीमित
है जो कि मनुष्य को ब्रम्ह के ज्ञान से ओझिल किये रहती है । ब्रम्ह जोकि माया का जनक
एवँ नियंत्रक है उसके लिये यह विद्यामाया है । ऐसा प्रतीत होता है कि ब्रम्ह माया
के मोटे कवच को ओढे रहता है ।
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