शनिवार, 30 अगस्त 2014

माया का रूप 6

माया के रूप 5 में अंकित अविद्या माया मात्र हम मनुष्यों के लिये सीमित है जो कि मनुष्य को ब्रम्ह के ज्ञान से ओझिल किये रहती है । ब्रम्ह जोकि माया का जनक एवँ नियंत्रक है उसके लिये यह विद्यामाया है । ऐसा प्रतीत होता है कि ब्रम्ह माया के मोटे कवच को ओढे रहता है ।

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