शनिवार, 23 अगस्त 2014

तिरोधन

ब्रम्ह ने अपने को अपनी माया की आड में छिपा लिया । तिरोधन । मनुष्य मोंहित है माया में । इतना कि उसे ब्रम्ह की कोई कामना ही नहीं । ब्रम्ह छलिया है । उसने माया का विस्तार किया । हमारे अंदर वासनाओ को वहिर्मुखी बनाया । हम इतनी तल्लीनता से उन वासनाओं का पीछा करने लगे कि कंचिद हमें अपने अस्तित्व की वास्तविकता को जानने की आवश्यकता ही नहीं रह गई । तिरोधन । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें