रविवार, 31 अगस्त 2014

माया का रूप 7

संसार ब्रम्ह की अभिव्यक्ति है जबकि ब्रम्ह संसार का कारण है । अभिव्यक्ति सदैव कारण की अपेक्षा आंशिक सत्य होता है । इस कारण संसार ब्रम्ह की अपेक्षा आंशिक सत्य है । इस तर्क का प्रमाण संसार के अनुभव में व्याप्त विरोधाभास के अनुभवों से मिलता है । संसार विरोधाभास के अनुभवों से ओतप्रोत है । कहा जाय कि संसार विरोधाभास के अनुभवों का भोग है जबकि ब्रम्ह विरोधाभास से परे है । 

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