एक सीमित परिवेष में यह भी
परिवर्तन ही व्यक्त करती है । पुन: गति भी संसार के घटको के लिये ही प्रभावी होती
है । ब्रम्ह में किसी गति की कल्पना सम्भव नहीं है । इस प्रकार परिवर्तन के द्योतक
दूसरी विधा गति भी ब्रम्ह पर प्रभावी नहीं होती है । ब्रम्ह अपरिवर्तनीय अस्तित्व
है ।
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