शुक्रवार, 29 अगस्त 2014

माया का रूप 5

ब्रम्ह की माया से निर्मित संसार अपने जीवों से ब्रम्ह को ओझल करता है । इस रूप में इसे मोंह का निमित्त कहा जाना उचित है । यदि संसार को मात्र प्रकृतीय रचना माना जाय जिसका ब्रम्ह से कोई सम्बंध नहीं है तो ऐसी दशा में ब्रम्ह को जानने का कोई पथ नहीं मिलेगा । ऐसी दशा में संसार मोंह का निमित्त है । इस परिस्थिति में ब्रम्ह की माया अविद्या माया कही जावेगी । 

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