मैं और मैं-नहीं की प्रतिक्रिया
में सबसे पहले सृजित हुआ ब्रम्हाण्ड । यह समस्त रूप स्वरूपों को धारण किये होता है
। इसमें अनेको संसार, सौर मण्डल समाहित पाये जाते हैं । इसमें भूत, वर्तमान और भविष्य एक सर्वोच्च वर्तमान में समाया होता है । इसके उत्पत्ति के
वाद पैदा हुई रचनाये इसके अंदर सूक्ष्म अंग के रूप में समाहित रहती हैं ।
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