मंगलवार, 12 अगस्त 2014

ब्रम्ह और ईश्वर

द्वैत से मुक्त आत्मा को यदि संसार की ओर से देखा जाय तो वह ब्रम्ह में लीन प्रगट होगी । इसी प्रकार यदि ब्रम्ह की ओर से संसार को देखा जाय तो इसमें अव्यक्त शक्ति ईश्वर के रूप में प्रगट होगी । ब्रम्ह और संसार दोनो एक ही सत्य के दो ध्रुव हैं । इन्हें अलग नहीं किया जा सकता है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें